रविवार, 29 नवंबर 2020

गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा देहरादून

 हिमालय के आँचल में बसा देहरादून

Dehradun Valley from Landour, By Paul Hamilton, Wiki

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून गढ़वाल हिमालय की तराई में बसा एक महत्वपूर्ण शहर है, जो राष्ट्रीय महत्व के कई शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों के लिए जाना जाता है। शहर बहुत पुरातन है। द्रोण नगरी के नाम से माना जाने वाला देहरादून अपना पौराणिक इतिहास लिए हुए है। सहस्रधारा की गुफा में स्थित द्रोणाचार्य की गुफा व उनका विग्रह आज भी इसकी गवाही देते हैं।

द्रोणाचार्य गुफा मंदिर, सहस्रधारा

टपकेश्वर में स्थित गुफा में माना जाता है कि द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का जन्म हुआ था। आज भी यहाँ की गुफा से गिरता जल शिवलिंग का अभिषेक करता है। इसी परम्परा में भारतीय सैन्य संस्थान (IMA - इंडियन मिलिट्री एकादमी) की स्थापना देहरादून में की गई, जहाँ से भारतीय सेना के लिए कमिशन्ड अफसर तैयार किए जाते हैं। इसके साथ यहाँ कई मिलिट्री स्कूल और कालेज भी हैं। गढ़ी कैंट में पूरी आर्मी की छावनी यहाँ स्थित है।

देहरादून का नाम सिखों के गुरु राम राय से भी जुडा हुआ है। जब वे पंजाब से आकर इस क्षेत्र में बसे तो उनके डेरों के नाम पर यहाँ का नाम देहरादून पड़ा। आज भी गुरु रामराय के आश्रम के साथ इनकी स्थापित शैक्षणिक संस्थाओं की भरमार है। जिसमें स्कूल, कालेज, युनिवर्सिटी से लेकर मेडिक्ल संस्थान एवं अस्पताल यहाँ मौजूद हैं।

गढ़वाल तथा शिवालिक पहाड़ों की तराई पर बसे होने के कारण यहाँ की आवोहवा न अधिक गर्म है और न अधिक ठण्डी। साथ ही घने वनों के बीच बसे होने के कारण प्रारम्भ में इस जगह को स्वास्थ्यबर्धक एवं बेहतरीन माना गया। हालाँकि राजधानी बनने के बाद यहाँ आबादी का दबाव बढ़  गया है तथा प्रदूषण से लेकर घिच-पिच आबादी और ट्रैफिक समस्याएं आए दिन सरदर्द बनती रहती हैं। हालाँकि कई फ्लाईओवर और वाईपास बनने से इससे निजात पाने के प्रयास जोरों से चल रहे हैं।

इसके बावजूद देहरादून में कई दर्शनीय स्थल हैं, जिन्हें व्यक्ति दो-तीन दिन में देख सकता है। सहस्रधारा का जिक्र पहले हो चुका, जो शहर के बाहर मसूरी बाईपास पर रायपुर से लगभग 8 किमी दूरी पर स्थित है। यहाँ गुफा व मंदिरों के अतिरिक्त सहस्रों धाराओं में बह रहे झरनों का प्राकृतिक दृश्य देखने लायक रहता है, जिसके आधार पर इसका नाम सहस्रधारा पड़ा है।

सहस्रधारा

झरनों के बीच कुछ गुफाएं भी हैं, जिनमें फिसलने से बचते हए आनन्द लिया जा सकता है। नीचे नाला बहता है, जिसको रोककर स्नान योग्य छोटी-छोटी झीलें बनाई गई हैं, जिसमें डूबकी का लुत्फ गर्मियों में उठाया जा सकता है। इसके तट पर गंधक का जलस्रोत भी है, जिसका जल चर्म रोगों के लिए उपयोगी माना जाता है।

यहीं से बापसी में मसूरी बाईपास से होकर सीधे साईं मंदिर आता है, जहाँ के शांत-एकांत वातावरण में कुछ भक्तिमय पल बिताए जा सकते हैं। इसके साथ ही बौद्ध गोम्पा के दर्शन किए जा सकते हैं, जिसमें कालेज भी है। सांईं मंदिर के आगे श्रीअरविंद आश्रम भी है, जहाँ ध्यान के कुछ पल विताए जा सकते हैं। इसके आगे माता आनन्दमयी का आश्रम है, माना जाता है कि माता आनन्दमयी ने उत्तराखण्ड में सबसे पहले इस स्थल पर पदार्पण किया था, जो उनकी कई लीलाओं का साक्षी रहा है। इस मार्ग पर नीचे किशनपुर चौराहे के आगे रामकृष्ण मिशन पड़ता है। यहाँ के आध्यात्मिक ऊर्जा से चार्ज शाँत परिसर में मंदिर दर्शन के बाद पुस्तकों का अवलोकन किया जा सकता है, जिसमें रामकृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानन्द की पुस्तकें उपलब्ध रहती हैं। यहाँ पुस्तकाय भी है, जिसमें बैठकर स्वाध्याय का लाभ लिया जा सकता है।

रामकृष्ण मंदिर

यहाँ से थोड़ा नीचे दायीं ओर लिंक रोड़ से टपकेश्वर पहुंचा जा सकता है जो तमसा नदी पर बसा है। इसी के पीछे कुछ किमी पर गुच्चु पानी पड़ता है, जिसे रोबर्ज केव भी कहा जाता है। अंग्रेजों के समय यह सुल्ताना डाकू के छिपने का ठिकाना था। ऊपर से खुले गुफनुमा मार्ग से इसके अंदर प्रवेश होता है। प्रायः घुटनों तक पानी के बीच इसमें चलना पड़ता है, जो बरसात में बढ़ जाता है। अंदर बैठने के कई ठिकाने हैं और जल-पान की व्यवस्था भी। कुछ स्टुडेंटस यहाँ के एकांत स्थल में परीक्षा की तैयारी करते देखे जा सकते हैं और साथ ही प्रेमी जोड़ों के लिए भी यह मिलने का एक आदर्श स्थल रहता है। अंदर 2-3 किमी तक पैदल चलते हुए दूसरी ओर से बाहर निकलने का रास्ता है। लेकिन इस एडवेंचर को ग्रुप में ही करना उचित रहता है, अकेले में व्यक्ति भटक सकता है और घबराहट में परेशान भी हो सकता है।

गुच्चु पानी गुफा प्रवेश

यहीं से वाहन से आर्मी केंटोनमेंट को पार करते हुए बन अनुसंधान संस्थान (FIR-द फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट) आता है, जिसे अब डीम्ड-यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है। वन से सम्बन्धित यह भारत का सबसे बड़ा प्रशिक्षण संस्थान है और अधिकाँश फोरेस्ट अफसर यहाँ से तैयार किए गए हैं। इसका परिसर 450 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। ग्रीको रोमन शैली में बना इसका भवन बास्तुशिल्प का एक उत्कृष्ट नमूना है, जो बहुत भव्य लगता है। इसमें वनों का बेहतरीन म्यूजियम बना हुआ है, जिसमें 700 साल पुराने वृक्ष के तने को तक संरक्षित रखा गया है। कुछ फीस के साथ यहाँ के हरे-भरे परिसर में यादगार पल बिताए जा सकते हैं। इसी के आगे आईएमए (इंडियन मिलिट्री एकेडमी) है, जिसके बाहर से दर्शन किए जा सकते हैं।

भारतीय सैन्य संस्थान (IMA)

इसके साथ देहरादून में तमाम राष्ट्रीय महत्व के संस्थान मौजूद हैं, जिन्हें अपनी रुचि के अनुसार भ्रमण किया जा सकता है। जैसे यूकोस्ट, सर्वे ऑफ इंडिया, वाइल्ड लाइफ इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया, वाडिया इंस्टीच्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, ओएनजीसी, इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ विजुअली हैंडिकेप (एनआईवीएच), बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल सोइल एण्ड वाटर कंजर्वेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट आदि। इसके साथ कई सरकारी तथा प्राईवेट विश्वविद्यालय एवं कॉलेज यहाँ स्थापित हैं, जैसे – दून विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ पैट्रोलियम, उत्तराँचल यूनिवर्सिटी, उत्तराँचल टेक्निकल यूनिवर्सिटी, ग्राफिक ईरा यूनिवर्सिटी, आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी, डीआईटी, जी हिमगिरि यूनिवर्सिटी, पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी, द राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआईएमसी), बीएफआईटी, डीएवी कालेज आदि।

घंटाघर - देहरादून का केंद्रिय स्थल


खरीददारी के लिए पलटन बाजार यहाँ की प्रमुख मार्केट हैं, जहाँ वीक-एंड में काफी भीड़ और हलचल रहती है। यहाँ पर घरेलु उपयोग की लगभग हर बस्तु उपलब्ध हो जाती है। यदि समय बिताना हो तो गाँधी पार्क में पेड़ों की छाया तले आराम से समय बिताया जा सकता है, जिसके बग्ल में पैरेड ग्राउंड है, जहाँ आए दिन कई तरह के मेले, उत्सब चलते रहते हैं। यहीं पर प्रेस क्लब के साथ एक बड़ी लाइब्रेरी भी है, जहाँ पुस्तक प्रेमी सदस्य बनकर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। इसके आस पास खाने-पीने के तमाम विकल्प उपलब्ध हैं। रेड़ी से लेकर ढावे एवं रेस्टोरेंट में आपके खानी-पीने की हर जरुरत पूरी हो जाती है।

बुद्धा टेम्पल, क्लेमेंटाउन

देहरादून का एक विशेष आकर्षण है बुद्धा टेम्पल, जिसका जिक्र किए बिना शायद देहरादून की यात्रा अधूरी मानी जाएगी। यह देहरादून के दक्षिणी छोर में क्लेमेंनटाउन में स्थित है, जहाँ बुद्ध भगवान का भव्य मंदिर है और एक तिबतन मार्केट भी। इसके पीछे साल का घना जंगल है। यहाँ कुछ पल शांति के साथ बिताए जा सकते हैं।

आईएसबीटी देहदरादून में बसों की बेहतरीन सर्विस रहती है, जहाँ से उत्तराखण्ड के किसी भी कौने तथा दूसरे प्राँतों के लिए बस उपलब्ध रहती हैं। यहाँ से मसूरी की पहाड़ियों के दर्शन सहज ही किए जा सकते हैं। रात को इसकी टिमटिमाटी रोशनी बहुत खूबसूरत लगती है। बर्फ पड़ने पर देहरादून से इसके सुन्दर नजारे देखे जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त देहरादून के थोड़ा बाहर हरिद्वार सड़क पर लक्ष्मण सिद्धबली मंदिर, आगे लच्छीवाला पिकनिक स्थल दर्शनीय हैं।

लच्छीवाला

मसूरी रोड़ पर माल्सी डीयर पार्क, क्रिश्चियन रिट्रीट सेंटर पड़ते हैं। ट्रैकिंग प्रेमी यहाँ से थोड़ी आगे शेखर फॉल की पैदल यात्रा कर सकते हैं, जो देहरादून में जल का एक प्रमुख स्रोत है। रायपुर साईड में मालदेवता भी दर्शनीय स्थल है। सांतला माता का मंदिर भी ट्रेकिंग व तीर्थाटन के हिसाब से एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

देहरादून में पुस्तक प्रेमियों के लिए कई बुक शॉप्स भी हैं, जैसे – बुक वर्ल्ड, इंग्लिश बुक डिपो, रमेश बुक डिपो आदि। लेखकों के लिए विंसर पब्लिकेशन, समय साक्ष्य जैसे प्रकाशन भी यहाँ उपलब्ध हैं। इसके साथ कई एनजीओ यहाँ के परिसर में हैं, जैसे नवधानिया, हेस्को आदि। जो जैविक खेती, बीज एवं जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, जिनकी ज्ञानबर्धक जानकारी आप आगे दिए गए लिंक्स में पढ़ सकते हैं।

नवधान्या विद्यापीठ

हेस्को - प्रकृति-पर्यावरण एवं ग्रामीण विकास की अभिवन प्रयोगशाला

ऑर्गेनिक फार्मिंग, जैव विविधता संरक्षण की प्रयोगशाला - नवधान्या विद्यापीठ