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शिक्षक दिवस पर विशेष – शिक्षक, गुरु एवं आचार्य

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आचार्य की भूमिका में तैयार हों शिक्षक शिक्षक दिवस पर या गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बधाईयों का तांता लग जाता है, मोबाईल से लेकर सोशल मीडिया पर। गुरु, शिक्षक एवं आचार्य जैसे शब्दों का उपयोग इतना धड़ल्ले से होता है कि कन्फ्यूजन हो जाती है। सामान्य जनों को न सही, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों में इनकी तात्विक समझ जरुरी है, इनके शब्दों के मूल भावार्थों का स्पष्ट बोध आवश्यक है, जो कि उनके जीवन के दिशा बोध से भी जुड़ा हुआ है। गुरु – भारतीय संदर्भ में गुरु का बहुत महत्व है, जिसे भगवान से भी बड़ा दर्जा दिया गया है। उस शब्द में जी जोड़कर अर्थात गुरुजी का उपयोग कभी भारी तो कभी हल्के अर्थों में किया जाता है। लेकिन गुरु शब्द का मानक उपयोग उन प्रकाशित आत्माओं के लिए है, जिनको आत्मबोध, ईश्वरबोध या चेतना का मर्मबोध हो गया। इस आधार पर गुरु आध्यात्मिक रुप में चैतन्य व्यक्ति हैं। आश्चर्य नहीं कि शिष्यों को आध्यात्मिक मार्ग पर दीक्षित करने वाले ऐसे गुरु कभी बिना ईश्वरीय आदेश के इस कार्य में हाथ भी नहीं डालते थे।  इसी तरह शिष्य की अपनी विशिष्ट पात्रता होती थी, जिन कसौटी पर बिरले ही