शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

यात्रा वृतांत - मेरी पोलैंड यात्रा, भाग 5


काजिमीर विल्की यूनिवर्सिटी कैंपस में पहला दिन


आज हमारा विश्वविद्यालय का पहला दिन था। अपने आवास से मुश्किल से आधा किमी पैदल चलकर हम विश्वविद्यालय गेट पर पहुँचते हैं। इसके साथ ही बोटेनिक्ल गार्डन सटा है, जो बाहर से देखने पर गगनचूम्बी वृक्षों एवं हरियाली से लैंस है। बीच-बीच में फूलों की क्यारियाँ अपनी सतरंगी छटा बिखेर रही थी। इसको फुर्सत में देखने व अवलोकन का मन बन चुका था। 
खेर अभी हम गेट से परिसर में प्रवेश करते हैं। विश्वविद्यालय का यह मुख्य परिसर है, जहाँ यूनिवर्सिटी का इंटरनेशनल रिलेशन विभाग स्थित है। विभाग की प्रमुख मेडेम अनिला से हमारी ऑफिशियल मुलाकात यहीं होनी थी। हालाँकि फोर्मल मुलाकाल पिछले कल उनके परिवार संग रुबरू रेस्टोरेंट में हो चुकी थी। उनकी सहयोगी मेडेम काल्का हमें यहाँ तक आने का रास्ता कल बता चुकी थी। इनसे भी मुलाकात होनी थी।
प्रकृति की गोद में बसा हुआ कैंपस बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। चेस्टनेट के पेड भी कतार में सजे मिले, रंग-बिरंगे फूलों के साथ क्यारियाँ सजीं थी। क्रिसमस ट्री एवं देवदार के पेड़ों के बीच यहाँ के पारम्परिक शैली में बने भव्य भवन नए प्रदेश एवं परिवेश में प्रवेश का अनुभव दे रहे थे। अपने होस्ट से पहली ऑफिश्यल इंटरएक्शन की उत्सुक्तता स्वाभाविक थी।


बोटेनिक्ल गार्डन की साइड से युनिवर्सिटी कैंपस में प्रवेश होता है, हरे-भरे कैंपस के बीच पारम्परिक भवनों का संयोजन बहुत सुन्दर लग रहा था। यहाँ के शहरों की तरह कैंपस की स्वच्छता और सुव्यवस्था हर ओर नजर आ रही थी। भवन के चारों और तथा मार्ग में क्रिस्मस ट्री के छोटे-बड़े पौधे यहाँ की सुंदरता में चार-चाँद लगा रहे थे। प्रकृति की गोद में कैंपस की स्थिति हमें अपने घर का शीतल अहसास दिला रही थी। निश्चित रुप में इस ठण्डे इलाके में ऐसे वृक्ष किसी हिल-स्टेशन का अहसास दिला रहे थे।

अंतर्राष्ट्रीय संपर्क विभाग के भवन के गेट पर हमें चैरी का पेड़ मिला, जिसमें अभी चैरी के फूल झड़ चुके थे, नन्हीं-नन्हीं चैरियाँ हरे पत्तों के बीच से झाँकती दिख रहीं थी। रास्ते के दोनों ओर रंग-बिरंगे सुंदर फूल खिले थे। भवन में प्रवेश के बाद दूसरी मंजिल पर हम कमरे में प्रवेश करते हैं। मेडेम काल्का से मुलाकात होती है, वे अपनी बॉस अनिला मेडेम से उनके चैंबर में मिलवाती हैं। गर्मजोशी के साथ स्वागत होता है। मैडेम एनिला एक डायनमिक लेडी हैं, साथ ही मस्तमौला एवं व्यवहारकुशल। ये देवसंस्कृति पधार चुकी हैं व मुलाकात से यहां से जुड़ी पुरानी यादों को आज ताजा अनुभव कर रही थी। 
फिर काल्का मेडेम हमें अपनी गाड़ी में बिठाकर स्थानीय बैंक तक ले जाती हैं, जहाँ इरेस्मस स्कोलर्शिप की राशि को इनकैश किया जाना था।

शहर की सुंदर सडकों के बीच हम कुछ ही मिनट में कई चौराहों को पार करते हुए शहर के एक एकांतिक छोर तक पहुँच चुके थे, जिसके दायीं ओर ट्रेन रुट था व बीच में चीड़ के घने जंगल, जिनका जिक्र हम बिडगोश हवाई पट्टी पर कर चुके हैं। हमें इसकी सघन हरियाली खासी मनभावन एवं प्रशांतक लगी। थोड़ी ही देर में एक नवनिर्मित भवन के सामने पार्किंग में गाड़ी रुकती है। भवन यहाँ का बैंक था। भवन के अंदर खिड़कियों में लगे बड़े-बड़े सीसों से बाहर का प्राकृतिक नजारा स्पष्ट दिख रहा था। भवन का प्रकृति के साथ इतना सुंदर संयोजन हमें अंदर से आल्हादित कर रहा था।
देख हम सोचते रहे कि भारतीय शहरों में हम इस मामले में कितने लापरवाह रहते हैं। हमारे शहरों व कस्वों के भवन निर्माण में प्रकृति, हरियाली, पेड़ों के लिए कोई स्थान नहीं रहता। यहाँ भवन के अंदर जो स्पेस दिया गया था व जो स्वच्छता दिखी, लगा अध्यात्म का पहला पाठ – स्वच्छता एवं सुव्यवस्था यहाँ के लोग सीख चुके हैं। बस इनको आगे की गहराई में उतरना बाकि है।
बैंक से पैसा निकालने के बाद हम वाईस रेक्टर प्रो. मैको से मिलने बाले थे। इनके दर्शन हम देवसंस्कृति विवि में कर चुके थे, जब से पूरे डेलीगेशन के साथ दो-तीन साल पहले आए थे। धीर-गंभीर, ऊँचा कद, सुगठित शरीर एवं एक जेंटलमेन लुक – अक्स अभी ही हमारे जेहन में था। आज किस रुप में इनसे मुलाकात होने वाली है, उत्सुक्तता थी। क्योंकि वाईस रेक्टर हमारे यहाँ के वाईस चांस्लर जैसा सीनियर अकादमिक पद होता है।
इनसे हमारी मुलाकात विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग एवं कम्प्यूटिंग कैंपस में होती है। जब हम भवन में पहुँचे तो प्रो. मैको प्रयोगशाल में यहाँ के वैज्ञानिकों के साथ काम कर रहे थे।
अपनी बर्दी में सफेद गाउन ओढ़े एक वैज्ञानिक, एक जैंटलमेन अपनी मासूम मुस्कान के साथ सामने खड़ा था व गर्मजोशी के साथ हमारा स्वागत कर रहा था। ये वैज्ञानिक के साथ एक योगी भी हैं, जो कई वर्षों से योगाभ्यास कर रहे हैं। इनसे मिलने के बाद समझ में आया कि यहाँ शोध को कितना महत्व दिया जाता है। प्रयोगशाला में ये अकादमिक अधिकारी नहीं होते, एक वैज्ञानिक की भाँति दतचित्त होकर अपने अनुसंधान में अपने छात्रों एवं सह वैज्ञानिको के साथ कुछ नए अन्वेषण में मग्न होते हैं।

इस बक्त इनका थ्री–डी प्रिंटिंग को लेकर महत्वपूर्ण प्रयोग चल रहे था, जिसे ये स्थानीय अस्पताल में दिव्यांग बच्चों की आवश्यकता को देखते हुए तैयार कर रहे थे। ऐसे ही इन्होंने तमाम सफल प्रयोग दिखाए जिन्हें चिकित्सा  से लेकर शिक्षा एवं इंडस्ट्री की माँग के हिसाब से तैयार किया गया था। बाद में पता चला कि प्रो. मैको अपनी फील्ड के जाने-माने वैज्ञानिक हैं व पौलेंड में अपने विषय़ के शीर्ष वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता के रुप में प्रतिष्ठित हैं। इनकी कार्य एवं व्यक्तित्व में हमें वैज्ञानिक अध्यात्म की झलक मिल रही थी, जहाँ एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक जीवन दृष्टि एवं मूल्यों के साथ शोध में संलग्न होता है तथा एक योगी एक वैज्ञानिक सी प्रयोगधर्मिता के साथ सत्य का शोध-अनुसंधान कर रहा होता है।
प्रयोगशाला में इनके कार्य को देखने के बाद हम इनके विभागीय ऑफिस में गए। जबकि इनका वाईस-रेक्टर के ऑफिस में इनसे मुलाकात कल होने वाली थी, जहाँ इनके साथ लंच का भी प्रावधान रखा गया था।

प्रो. मैको से मुलाकात के बाद हम यहाँ के सबसे बड़े माल में जाते हैं, जो कई मंजिला था। इसमें शायद ही कुछ ऐसा हो जो यहाँ न मिलता हो। यहाँ एक काउँटर पर करेंसी एक्सचेंज करते हैं, क्योंकि जो पैसे बैंक से निकाले थे, वे यूरो में थे, जबकि यहाँ खर्च के लिए हम पोलैंड की करेंसी ज्लोटी में आवश्यकता थी। कार पार्किंग तक आते-आते हम मॉल का विहंगावलोकन करते रहे, जहाँ अगले दिनों फुर्सत में एक दिन यहाँ आकर यहाँ से कुछ परचेजिंग करनी थी।
मैडेम काल्का का पग-पग पर अपनी गाड़ी में कैंपस का भ्रमण एवं आवश्यकताओं का ध्यान हमें गहरे छू रहा था। अपने कर्तव्य के प्रति सजग एवं निष्ठ काल्का मैडेम हमें एक सुगड़ महिला प्रतीत हुई, अपने केयरिंग एवं जेंटल अंदाज के साथ बड़ी बहन जैसा फील दे रही थी, हालांकि उम्र में शायद वो हमसे छोटी ही रही होंगी।
बापसी में काल्का मैडेम हमें बोटेनिक्ल गार्डन पर उतारती हैं, जिसे देखने की इच्छा हम प्रातः जाहिर कर चुके थे। गेट में प्रवेश करते ही पहले कृत्रिम झील के दर्शन होते हैं, जिसके किनारे पेड़ के कटे ठूंठों की सुंदर बैठकें बनी थी। झील के किनारे व झील में पक्षी चहचहा रहे थे।
गगनचूम्बी देवदार के वृक्षों के बीच यहाँ का एकांत-शांत परिवेश हमें स्वर्ग का अहसास दे रहा था। पार्क के हर कौने में फूलों से लदी झाड़ियाँ हमारा स्वागत कर रही थीं। एक क्यारी में नीले फूलों के गुच्छ हमारे हिमाचल में उगने वाले फूलों की याद दिला रहे थे, जिसके नीले खुशबूदार गुच्छे हमें बचपन में प्रमुदित करते थे।
कुछ फूल तालाब में सजे थे, तो छोटे आर्किड के फूल अपनी ही रौनक बिखेर रहे थे। बुजुर्ग, युवा एवं बच्चे सभी पार्क में घूम रहे थे व यहाँ के एकांत-शांत एवं शीतल परिवेश का आनन्द ले रहे थे।
इस तरह आज का हमारा सफर पूरा होता है। बापसी में रास्ते के स्टोर से आवश्यक फल सब्जी, दूध एवं ब्रेड आदि लेते हैं व अपने विश्रामस्थल पहुँचते हैं। कल विभाग में परिचय एवं प्रेजन्टेशन का क्रम शुरु होना था और फुर्सत के पलों में पड़ोस के ऐतिहासिक शहर तोरुन के दर्शन भी करने थे, जो महान वैज्ञानिक कोपर्निक्स की जन्म स्थली एवं कार्यभूमि रहा है।
    अगली ब्लॉग पोस्ट यहाँ के यात्रा वृतांत, पोलैंड का छिपा नगीना - तोरुण शहर को पढ़ सकते हैं।

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

In the Holy company of Swami Vivekananda

Concentration of mind – the Key
To me the very essence of education is concentration of mind, not the collection of facts....Ninety percent of thought force is wasted by the ordinary human being and therefore he is constantly committing blunders; the trained man or mind never makes a mistake.
Free! We cannot, for a moment, govern our own minds, nay, cannot hold our mind on a subject, focus it on a point to the exclusion of everything else for a moment! Yet we call ourselves free. Think of it!...The mind uncontrolled and unguided will drag us down, down, for ever – rend us – kill us; and mind controlled and guided will save us, free us.
 

Take up one idea. Make that one idea your life - think of it, dream of it, and live on that idea. Let the brain, muscles, nerves, every part of your body, be full of that idea, and just leave every other idea alone. This is the way to success…If we really want to be blessed and make others blessed, we must go deeper.


Education is not the amount of information that is put into your brain and runs riot there, undigested, all your life. We must have life-building, man-making, character-making assimilation of ideas. If you have assimilated five ideas and made them your life and character, you have more education than any man who has got by heart a whole library                                              (Source: Vivekananda, His Call to the Nation)  

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

ब्लॉगिंग - पहला कदम

ब्लॉगर पर ब्लॉगिंग की शुरुआत करें कुछ ऐसे
 
 
यदि आप ब्लॉगिंग की दुनियाँ से अधिक परिचित नहीं है व ब्लॉगिंग करना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है। यह पोस्ट विशेषरुप से ऐसे जिज्ञासु पाठकों के लिए लिखी जा रही है, जो अपना ब्लॉग शुरु करना चाहते हैं, लेकिन इसके बारे में अधिक नहीं जानते। यह पोस्ट आपको मोटा-मोटी कुछ ऐसे जानकारियाँ देगी, जो नए ब्लॉगर के लिए उपयोगी साबित होंगी व आप निर्बाध रुप में अपना ब्लॉग जारी रख सकेंगे व इसके क्रिएटिव एडवेंचर का हिस्सा बनेंगे।
हमें याद है कि जब वर्ष 2013 में हमने अपना यह ब्लॉग शुरु करना चाहा, तो इसकी पहली पोस्ट डालने से कई माह लग गए। पहला कारण था उचित मार्गदर्शन का अभाव और दूसरा परफेक्ट समय का इंतजार। इस परफेक्शनिज्म के कुचक्र से अंततः हम अप्रैल 2014 में बाहर आते हैं और अपना पूरा साहस बटोर कर पहली पोस्ट के साथ ब्लॉगिंग की दुनियाँ में कदम रखते हैं। 

 
इसी तरह सप्ताह-दस दिन के अन्तराल में अगली पोस्ट डालते जाते हैं और शेयर करते हैं। बीच-बीच में उत्साहबर्धक कमेंट्स मिलते गए, तो लगा कि कंटेंट सही दिशा में जा रहा है। हालाँकि अधिकाँश पोस्टों में कमेंट्स नहीं भी मिले, लेकिन ब्लॉग में बने डैशबोर्ड पर आँकड़ों से पाठकों की संख्या को देख, लेखों की पठनीयता का अंदाजा मिलता रहता। हालाँकि अब हम इस लाईक-कमेंट्स के मायावी कुचक्र से काफी-कुछ बाहर आ चुके हैं, लेकिन शुरुआती दौर में तो ये सब काफी मायने रखता ही है।
 
मालूम हो कि ब्लॉग की शुरुआत वर्ष 1994 में वेब-डायरी के रुप में हुई थी, लेकिन आज इसका संसार इसके बहुत आगे निकल कर व्यापक रुप ले चुका है। 
 
ब्लॉग का उद्भव एवं विकास यात्रा...
 
हमारे विचार में ब्लॉग रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक ऐसा प्लेटफोर्म है, जहाँ आप अपने विषय के ज्ञान को जिज्ञासु पाठकों के साथ साझा करते हैं। यदि आप अभी विषय विशेषज्ञ नहीं भी हैं, तो भी हर व्यक्ति कुछ मौलिक विशेषताएं लिए होता है, बाहर प्रकट होने के लिए कुछ मौलिक विचार, भाव एवं आइडियाज कुलबुला रहे होते हैं, इन्हें तराशकर दूसरों के साथ शेयर किया जा सकता है। ब्लॉग इसमें बहुत सहायक रहता है। क्रमशः आपकी एक वेब डायरी बनती जाती है, जहाँ आपकी मौलिकता एवं रचनात्मक उत्कृष्टता के कदरदान मिल ही जाते हैं। 
इस संदर्भ में यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक माध्यम है। यदि कंटेट की गुणवत्ता में क्रमशः इजाफा करते रहेंगे, तो पाठकों का प्रवाह बना रहेगा। इसके अतिरिक्त कुछ नए सृजन का आनन्द अपनी जगह, जो स्वयं में एक पारितोषिक रहता है, जो दूसरों की तारीफ न मिलने पर भी ब्लॉगर को मस्त मग्न रखता है। क्रमशः ब्लॉगिंग के तमाम लाभ निष्ठावान ब्लॉगर को समझ आते हैं।
 
ब्लॉगिंग के लाभ
 
अतः ब्लॉग में क्या लिखें, क्या शेयर करें, तो मोटा सा नियम है कि जो रचनात्मक संभावनाएं (किएटिव पोटेंशियल) आपके अंदर पक रही हैं, विचार-भावनाओं का समन्दर लहलहा रहा है, कुछ खिच़ड़ी पक रही है। उसे आप थोड़ा मेहनत कर सृजनात्मक तरीके से पेश कर शेयर कर सकते हैं। यह एक लेख हो सकता है, एक कविता भी हो सकती है, यात्रा वृतांत हो सकता है, एक कहानी हो सकती है या कोई पुस्तक या फिल्म समीक्षा हो सकती है या किसी ज्वलंत मुद्दे फर आपकी परिपक्व राय हो सकती है या आपकी विशेषज्ञता के अनुरुप कुछ और। यह पाठकों की आवश्यकता के अनुुरुप तैयार किया गया कंटेट भी हो सकता है, जिसे आप अपनी विशेषज्ञता के आधार पर साझा करने में सक्षम होते हैं। कुल मिलाकर यह आपके पैशन, आपकी रचनात्मक संभावनाओं, आपके निहायत मौलिक अनुभवों एवं जीवन दर्शन की रचनात्मक अभिव्यक्ति होती है, जिनके साथ आप अपने जीवन की यात्रा में निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ रहे होते हैं। 
 
सृजनात्मक जीवन की साहसिक यात्रा

यदि आप लेखन के क्षेत्र में नौसिखिया हैं व शुरुआती लेखन के गुर जानना चाहते हैं तो इसके लिए आप हमारी ब्लॉग पोस्ट - लेखन की शुरुआत करें कुछ ऐसे को पढ़ सकते हैं, लेखन के विभिन्न चरणों को समझ सकते हैं व आजमा सकते हैं और ब्लॉग की पहली उमदा पोस्ट तैयार कर शेयर कर सकते हैं। इसे शेयर करने के लिए प्रारम्भिक ब्लॉगर्ज के लिए सबसे सरल एवं निःशुल्क व्यवस्था गूगल में उपलब्ध ब्लॉगर सेवा है।
 
 
अपने जीमेल (gmail) एकाउंट के साथ आप अपना खाता खोल सकते हैं, अपना मनभावन नाम देते हुए ब्लॉगर पर उपलब्ध उचित टैंपलेट का चुनाव कर तैयार की गई पहली पोस्ट के साथ शुभारम्भ कर सकते हैं।  
https://www.blogger.com  को खोलें।
create your blog बटन को क्लिक कर, इसमें जीमेल के साथ प्रवेश करें।
ब्लॉग को उचित शीर्षक (Title) दें,
Address में blogspot.com से पहले उचित नाम दें, जो इसमें स्वीकार्य हो। बाद में custom domain से इसे बदला या परिवर्धित किया जा सकता है।
theme में उपलब्ध कई थीम्ज से उपयुक्त का चयन करें, इसे आप बाद में अपनी आवश्यकता व रुचि के अनुरुप बदल सकते हैं।
आपका ब्लॉग तैयार हो जाएगा।
New post बटन को क्लिक कर उपयुक्त शीर्षक व नीचे खाने में टाईप किया मैटर पेस्ट् करें।
दायीं ओर ऊपर post setting में label को क्लिक कर पोस्ट से जुड़े तीन-चार की-वर्ड टाईप करें, जो पोस्ट प्रकाशित करने के बाद पोस्ट के नीचे अंत में दिखेगी
ऊपर दायीं ओर Publish बटन दवाने पर पोस्ट पब्लिश हो जाएगा। इससे पहले preview बटन को दबाकर पोस्ट के स्वरुप को प्रकाशन से पूर्व एक बार चैक कर सकते हैं। 
 अब आपका ब्लॉअपनी पहली पोस्ट के साथ तैयार है। जिस आप जब चाहें अपने मित्रों या पब्लिक के बीच विभिन्न सोशल मीडिया में शेयर कर सकते हैं।
 
 
एक ब्लॉग के लेआउट में मोटा-मोटी चार हिस्सा होते हैं।
 
एक ब्लॉग की आधारभूत संरचना
 
ऊपर हेडर में ब्लॉग का शीर्षक व इसके सार को अभिव्यक्त करता उपशीर्षक व उपयुक्त फोटो। इसके दायीं और मुख्य कंटेंट रहता है, जिसमें आपकी नयी पोस्ट की लिखी हुई सामग्री व फोटो रहती हैं। ब्लॉग के वायीं और साईडवार में आपका प्रोफाईल फोटो-संक्षिप्त परिचय, विज्ञापन, आपके अनुसरणकर्ता, लोकप्रिय पोस्टों की एक निश्चित संख्या, कुल दर्शक संख्या आदि होते हैं इसी तरह ब्लॉग के नीचे फुटर में अपनी संपर्क मेल, कॉपीराईट स्टेटमेंट, व कोई विशिष्ट पोस्ट आदि को सजा सकते हैं।

अपनी पोस्ट के साथ विषयानुरूप उचित चित्रों का संयोजन कर इसे और अधिक रोचक एवं प्रभावशाली बना सकते हैं। इसके साथ ब्लॉग के लेआउट में जाकर विभिन्न गैजेट्स जोड़कर अपने ब्लॉग को अधिक आकर्षक, यूजर फ्रेंडली एवं प्रभावशाली बना सकते हैं।
 
          ले आउट सेक्शन में उपलब्ध गैजेट वार
 
ब्लॉग के संदर्भ में एक अहं बात का यहाँ जिक्र करना चाहूंगा, जिससे आपका ब्लॉग एक बार शुरु होकर फिर अनवरत चलता रहे। वह है ब्लॉग से जुड़ा आपका पैशन या जुनून। एक बार इसको अवश्य टटोलें व खोजें, जो आपके जीवन के मकसद से जुड़ा हो, जिससे कि इसे आप परिस्थितियों के तमाम विषम थपेड़ों के बीच भी उत्साह एवं निष्ठा के साथ आगे बढ़ सकें। इसके अभाव में नियमित अन्तराल पर ब्लॉग को मेंटेन रखना कठिन हो जाता है। 
हम कितने ऐसे ब्लॉगर्ज को जानते हैं, जो शुरु तो जोश के साथ किए थे, लेकिन जोश कुछ माह बाद ठंडा पड़ता गया। फिर कई महिनों का गैप होता गया। कुछ तो सालों का गैप लिए हुए हैं तथा जोश में शुरु हुए ब्लॉग अपने वजूद के लिए संघर्ष की स्थिति में हैं तथा कई अपना दम तोड़ चुके हैं। 
आपके ब्लॉग के साथ भी ऐसा कुछ न हो, तो समझना जरुरी है कि ब्लॉग के बारे में आपका पैशन ही शुरुआत है, आपका जुनून ही मध्य है और यही आपको नए मुकाम तक पहुँचाने वाला कीमिया है। 
 
ब्लॉगिंग का सारा खेल आपके पैशन, आपके जुनून का है
 
यदि आप अपनी ब्लॉगिंग पर डटे रहे, तो क्रमशः आपकी लेखन शैली में सुधार आएगा। आपके विचारों में धार आएगी। हर ब्लॉग के साथ मन का गुबार हल्का होगा तथा सृजन का आनन्द आपकी झोली में होगा। इसके साथ आपके ब्लॉग पर ट्रेफिक बढ़ना शुरु होगा। एक सुहानी सुबह आपको सुखद अहसास होगा कि अपनी रूचि के कुछ विषयों में आप एक विशेषज्ञ के रुप में उभर रहे हैं। गूगल में अपने ट्रैफिक फ्लो के साथ इन विषयों का आप इसका सहजता से अनुमान लगा सकते हैं। 
और यदि आप कभी चाहें तो ब्लॉगिंग को एक प्रोफेशनल ब्लॉगर्ज के रुप में अपनी कमाई का माध्यम भी बना सकते हैं। हालांकि इसकी अलग दुनियाँ है, जिस पर अभी हम अधिक कहने के अधिकारी विद्वान नहीं है। लेकिन सार रुप में ब्लॉग कमाई का भी माध्यम हो सकता है। ब्लॉग शुरु करने के कुछ माह बाद ही ब्लॉगर में उपलब्ध एड-सेंस एक्टिवेट हो जात है और आपके ब्लॉग को विज्ञापन मिलना शुरु हो जाते हैं, जिन पर यदि कोई पाठक क्लिक करता है, तो एक निश्चित राशि आपके ब्लॉग खाते में जुड़ना शुरु हो जाती है।
आर्थिक पहलु को छोड़ भी दें, तो ब्लॉग क्रिएटिव लोगों के लिए एक अद्भुत प्लेटफॉर्म है। अध्ययन-अध्यापन एवं पढ़ने-लिखने से जुड़े लोगों के लिए तो यह अभिन्न सहचर है, जिसे आज के वेबमाध्यम के युग में नजरंदाज नहीं किया जा सकता। (और कोविड काल के बाद तो यह प्लेटफार्म ऑनलाईन पढ़ाई का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर चुका है, जिसे कोई भी शिक्षा से जुड़ा व्यक्ति नजरंदाज नहीं कर सकता।)
 


ब्लॉगिंग का अकादमिक महत्व

तः एक बार शुरु करने के बाद फिर आपको अपने ब्लॉग पर नियमित अन्तराल पर कुछ लिखते रहना है, कोई भी माह नागा नहीं जाना चाहिए, यह न्यूनतम है। अधिक की कोई सीमा नहीं। औसतन दो से तीन पोस्ट तो माह में डाल ही सकते हैं। यह एक मेरी तरह स्वान्तः सुखाय ब्लॉगर्ज का औसत है, जबकि प्रोफेशनल ब्लॉगर्ज का औसत सप्ताह में दो-तीन पोस्ट रहती है। आप भी अपनी शुरुआत न्यूनतम निष्ठा के साथ हल्के एवं मस्ती भरे अंदाज में कर सकते हैं। 
यदि इतना कुछ समझ आ रहा हो, तो फिर इंतजार कैसा? 
आज, इसी सप्ताह आप अपने जुनून के साथ अपनी रचनात्मक संभावनाओं (creative potential) को अभिव्यक्त करते एक उम्दा ब्लॉग की शुरुआत कर सकते हैं। ब्लॉगिंग की रोमाँचक दुनियाँ आपका इंतजार कर रही है।
 
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