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यात्रा वृतांत - हेमकुंड़ साहिब का रोमाँचक सफर-2(समाप्न किश्त)

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घाघरिया से हेमकुंड साहिब एवं बापस गोविंदघाट   फूलों की घाटी की ओर – घाघरिया से फूलों की घाटी महज 3-4 किमी आगे है। अतः आज के बचे हुए समय में हम यहाँ के दर्शन करना चाह रहे थे। हेमकुंड से आ रही हेमगंगा(लक्ष्मणगंगा) के पुल को पार कर हम फूलों की घाटी में प्रवेश के इच्छुक थे। लेकिन वहाँ पता चला कि 2 बजे के बाद घाटी में प्रवेश वर्जित है। अतः हम वहीं घाटी द्वार पर एक ग्रुप फोटो के साथ संतोष कर वापिस हो लिए।   रास्ते में हनुमान मंदिर से होते हुए हेमकुंड मार्ग का अवलोकन करते हुए पार हुए। सामने हेमकुंड से आ रहे हिमनद पर बने झरने को देख सब उस ओर बढ़ चले। हेमगंगा की धारा के तेज प्रवाह को पार कर झरने तक बढ़ने लगे। ग्रुप के रफ-टफ लोग ही झरने तक पहुँच पाए, बाकि नीचे चट्टानों पर ही अठखेलियाँ करते रहे। झरने का आलौकिक दृश्य – झरने का दृश्य स्वयं में आलौकिक था। इंद्रधनुषी आभा के साथ इसका निर्मल जल झर रहा था। कल-कल कर हवा में घुलता इसका दिव्य निनाद मन को ध्यान की गहराइयों में उतार रहा था। सामने उस पार   फूलों की घाटी के पीछे के हिमाच्छादित पर्वत शिखर एकदम पास