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शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

ब्लॉगिंग की प्रारम्भिक चुनौतियाँ

 कुछ इस तरह करें इनको पार

यदि आपका ब्लॉग शुरु हो चुका है, तो इसके लिए आपको बधाई। अब अगले कुछ माह आप इसके सबसे महत्वपूर्ण एवं कठिन चरण से होकर गुजरने वाले हैं, जो यह तय करेगा कि आपका ब्लॉग अंजाम की ओर बढ़ेगा या फिर रास्ते में ही कहीं खो जाएगा। क्योंकि ब्लॉगिंग में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों में 10 फीसदी व्यक्ति ही अपने ब्लॉग को आगे जारी रख पाते हैं। बाकि 90 प्रतिशत ब्लॉगिंग को रास्ते में ही छोड़ देते हैं।

आप भी यदि अपने ब्लॉग को अंजाम तक पहुँचाना चाहते हैं, एक सफल ब्लॉगर के रुप में उभरना चाहते हैं, तो यहाँ शेयर किए जा रहे अनुभूत नुस्खे आपके काम आएंगे, ऐसा हमारा विश्वास है।

1.      नियमितता बनाएं रखें, नागा न करें जीवन के हर क्षेत्र की तरह ब्लॉगिंग भी नियमितता की माँग करती है। एक नियमित अन्तराल में अपना ब्लॉग लिखें व पोस्ट करते रहें। माह में 2-3 पोस्ट का औसत कोई कठिन टार्गेट नहीं है। लेकिन कोई भी माह नागा न हो, आपातकाल में भी न्यूनतम 1 पोस्ट तो किसी तरह से डालें ही। यह न्यूनतम है। यह हमारी तरह स्वान्तः सुखाय ब्लॉगर का औसत है, यदि आप प्रोफेशनल ब्लॉगर के रुप में आगे विकसित होना चाहते हैं, तो आप सप्ताह में दो-तीन पोस्ट की ओर बढ़ सकते हैं।

2.      अपने पैशन अर्थात् जुनून को करें शेयर जिस विषय के बारे में आप गहरा लगाव रखते हैं, जिसके बारे में आपका पर्याप्त अनुभव है या जिस पर आपको लगता है कि आप आधिकारिक रुप से कुछ कह सकते हैं, उसे ब्लॉग पोस्ट के रुप में तैयार करें। जितना आप विषय को एन्जॉयाय करेंगे, पाठक भी उस अनुभव का हिस्सा बन पाएंगे। यदि आप अनमने मन से मात्र अपना बुद्धि का उपयोग कर, ईधर-उधर से कंटेंट जुटाकर, बिना अनुभव किए विषय को लिखते हैं, तो यह पाठक की बुद्धि तक ही पहुँच पाएगा, उसके दिल को नहीं छू पाएगा।

3.      अपने नीच् (niche) की न करें अधिक चिंता यदि आपके ब्लॉग का केंद्रिय विषय (नीच्) अभी यदि स्पष्ट नहीं है तो चिंता न करें। जिस विषय पर आपका कुछ अधिकार है, जिसके बारे में आपके पास कुछ परिपक्व राय है, जो आपके पैशन से जुड़ा है, उस पर लिखते जाएं, शेयर करते जाएं। पाठक क्या पढ़ना पसन्द करते हैं, आपकी किस पोस्ट पर पाठकों का कैसा रिस्पोंस आता है, कुछ माह बाद यह स्पष्ट होने लगेगा। और आपका ब्लॉग नीच् (niche) भी स्पष्ट होता जाएगा। ब्लॉगिंग के शुरुआती दौर में इसकी अधिक चिंता न करें, समय के साथ इसकी स्पष्टता उभरती जाती है। यह एक क्रमिक प्रक्रिया है, जो समय के साथ निखरती है।

4.      कुछ भी लिखने की गलती न करें ब्लॉग में लेखों की संख्या को पूरा करने के लिए कुछ भी लिखकर पोस्ट करने की गलती न करें। क्वांटिटी से अधिक क्वालिटी पर ध्यान दें। ऐसा लिखें जिसे आप स्वयं पढना चाहें, जिसको बाद में पढ़ने पर आपको आनन्द आए, जिसको पढ़ने पर आपकी समस्याओं के समाधान मिले। हर विषय पर सैंकड़ों नहीं हजारों ब्लॉगर्ज रोज लिख रहे हैं, पाठक आपका ही क्यों पढ़ें, विचार करें। आपके ब्लॉग में पाठकों की किन्हीं जिज्ञासाओं के समाधान हो, किन्हीं प्रश्नों के जबाब हों, उनके ह्दय के सूखे पड़े कौने के लिए कुछ रोचक-रोमाँचक अनुभवों का साजो-सम्मान हो, तो आपके ब्लॉग की सार्थकता है। यदि विषय को आप अपने दिलो-दिमाग से लिखते हैं, तो उस पर आपके व्यक्तित्व की मौलिक छाप अवश्य पढ़ेगी और पाठक सामग्री की ताजगी अवश्य अनुभव करेंगे।

5.      कॉपी पेस्ट से बचें आजकल इंटरनेट आने से हर तरह का मैटर आसानी से उपलब्ध रहता है। अपने आलस-प्रमाद में विद्यार्थी परीक्षा में कॉपी-पेस्ट का पर्याप्त सहारा लेते हैं। ब्लॉगिंग में यह गलती न करें। एक तो गूगल गुरु इसको जाँचने में देर नहीं करता, जिससे आपके ब्लॉग की पर्फोमेंस आगे चलकर प्रभावित हो सकती है। आप कॉपी राइट या प्लैगरिज्म के कानूनी पचड़े में भी पड़ सकते हैं। साथ ही पाठक के बीच भी अपनी प्रामाणिकता खो बैठेंगे। यदि कहीं थोड़ी बहुत नकल करनी भी पड़े, तो अक्ल के साथ काम करें। आपके ब्लॉग का मैटर जितना मौलिक हो, ऑरिजनल हो, आपके व्यक्तित्व की खुशबू लिए हो, उतना ही बेहतर रहेगा।

6.      उचित फोटो को जोड़ें आपके विषय से जुड़े उपयुक्त फोटो का उपयोग करें, विशेषरुप से यात्रा वृतांत से जुड़े लेखन में, जहाँ चित्रों का बहुत महत्व रहता है। जो बात आप शब्दों में कह रहे होते हैं, उसमें रही सही कसर फोटो पूरा कर लेते हैं और आपकी ब्लॉग पोस्ट पाठकों को एक बेहरतीन अनुभव देती है। फोटो के चयन के संदर्भ में भी कॉपी-पेस्ट से बचें। यथासम्भव अपनी मौलिक फोटो का ही प्रयोग करें। फोटो को उचित कैप्शन के साथ प्रयोग करें।

7. पर्फेक्ट समय का न करें इंतजार – हर माह न्यूनतम संख्या में ब्लॉग पोस्ट करने के लिए आपको मेहनत करनी होगी, लेखन का एक दैनिक या साप्ताहिक शेड्यूल बनाना पड़ेगा और अंत में समय पर प्रकाशित करना होगा। इसमें अंतहीन बिलम्ब नहीं हो सकता, कि अभी पोस्ट पर्फेक्ट नहीं है, लोग क्या सोचेंगे आदि। इसकी अधिक परवाह किए बिना इतना ध्यान दें, कि आपकी पोस्ट न्यूतम मापदण्ड पूरा कर रही है। यदि थोड़ी बहुत कसर रह भी गई तो आप इसे बाद में भी रिवाइज कर सकते हैं। पोस्ट के संदर्भ में नियमितता का अपना महत्व है। हर माह बिना किसी नागा किए न्यूनतम ब्लॉग तैयार करना तथा पोस्ट करना अपने ब्लॉग की सफलता के संदर्भ में एक अलिखित करार है, जिसे आपको पूरा करना है।

8. उचित प्लेटफार्म पर करें शेयर, यदि आप ब्लॉग तैयार कर इसे पाठकों के बीच शेयर नहीं करेंगे, तो आपके लिखे पर पाठकों की क्या प्रतिक्रिया आती है, वे इसे कितना पढ़ते हैं, इनका रिस्पोंस जानना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं, जहाँ आपकी कुछ उपस्थिति दर्ज हो। एक तो इससे आपके ब्लॉग तक ट्रैफिक आएगा, और पाठकों की पसन्द, नापसन्द आदि के आधार पर फिर अपने लिखे में और क्या सुधार करना है, यह भी पता चलेगा। हर चीज पाठकों को पसन्द ही आए, यह जरुरी नहीं। आपने अपना वेस्ट उड़ेल दिया, इतना ही काफी है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उचित समय पर उत्कृष्टता के कदरदान मिल ही जाते हैं।

9. असफलता के लिए भी रहें तैयार, हमेशा आपके लिखे के लिए रिस्पोंस अनुकूल एवं उत्साहबर्धक ही रहे, जरुरी नहीं। कई पोस्ट में हो सकता है, कोई रिस्पोंस ही न मिले और ऐसे में आपको स्वयं पर ही संशय होने लगे कि ब्लॉगिंग मेरे वश की बात नहीं। इतनी सारी पोस्ट डाली, लेकिन कोई उत्साहबर्धक रिस्पोंस ही नहीं आ रहा। ऐसे उपेक्षा एवं रिजेक्शन के अनुभवों से हर ब्लॉगर्ज को दो चार होना पड़ता है। लेकिन यही आपके जुनून के लिए, पैशन के लिए मसाला भी है। अपने लिखे पर बारीकि से निरीक्षण करें, कहाँ कमी रह रही है, उसको समझें व सुधार करें। इसमें अनुभवीं लोगों का मार्गदर्शन भी ले सकते हैं। यदि आपके पैशन, जुनून में दम है तो हर असफलता से सीख लेते हुए इन्हें सफलता की सीढ़ी बना सकते हैं।

10. कैसे लिखें – यदि आप अभी नौसिखिया लेखक हैं, विचार भाव का समन्दर अंदर लहलहा रहा है, लेकिन इसको शब्द नहीं दे पा रहे। लिखने बैठते हैं, तो एक भी शब्द झर नहीं पाता, झरता भी है तो बेतरतीव रहता है। एक फ्लो में सधा हुआ लेखन नहीं बन पड़ रहा। यदि आप ऐसी कुछ दुबिधा के बीच लिख नहीं पा रहे और लेखन की शुरुआती बारीकियों से परिचित होना चाहते हैं, तो शुरुआती लेखन कला पर हमारी ब्लॉग पोस्ट (लेखन की शुरुआत करें कुछ ऐसे) पढ़ सकते हैं, जिसमें स्टेप वाइज कैसे आगे बढ़ें, इस पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो कोई कारण नहीं कि अगले कुछ माह में ब्लॉगिंग आपके जीवन का हिस्सा बन जाएगी और तब तक आपका गूगल एडसेंस भी एक्टिवेट हो चुका होगा। साथ ही ब्लॉगिंग की बारीकियां आपको अपने अनुभव से समझ आ रही होंगी और आप ब्लॉगिंग की प्रारम्भिक चुनौतियों को पार करते हुए ब्लॉगिंग की अगली कक्षा के लिए तैयार हो चुके होंगे।

यदि आपका ब्लॉग अभी तक नहीं बना है और आप अपना ब्लॉग बनाना चाहते हैं, तो आप पढ़ सकते हैं, ब्लॉगिंग की शुरुआत करें कुछ ऐसे।

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

ब्लॉगिंग - पहला कदम

ब्लॉगर पर ब्लॉगिंग की शुरुआत करें कुछ ऐसे
 
 
यदि आप ब्लॉगिंग की दुनियाँ से अधिक परिचित नहीं है व ब्लॉगिंग करना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है। यह पोस्ट विशेषरुप से ऐसे जिज्ञासु पाठकों के लिए लिखी जा रही है, जो अपना ब्लॉग शुरु करना चाहते हैं, लेकिन इसके बारे में अधिक नहीं जानते। यह पोस्ट आपको मोटा-मोटी कुछ ऐसे जानकारियाँ देगी, जो नए ब्लॉगर के लिए उपयोगी साबित होंगी व आप निर्बाध रुप में अपना ब्लॉग जारी रख सकेंगे व इसके क्रिएटिव एडवेंचर का हिस्सा बनेंगे।
हमें याद है कि जब वर्ष 2013 में हमने अपना यह ब्लॉग शुरु करना चाहा, तो इसकी पहली पोस्ट डालने से कई माह लग गए। पहला कारण था उचित मार्गदर्शन का अभाव और दूसरा परफेक्ट समय का इंतजार। इस परफेक्शनिज्म के कुचक्र से अंततः हम अप्रैल 2014 में बाहर आते हैं और अपना पूरा साहस बटोर कर पहली पोस्ट के साथ ब्लॉगिंग की दुनियाँ में कदम रखते हैं। 

 
इसी तरह सप्ताह-दस दिन के अन्तराल में अगली पोस्ट डालते जाते हैं और शेयर करते हैं। बीच-बीच में उत्साहबर्धक कमेंट्स मिलते गए, तो लगा कि कंटेंट सही दिशा में जा रहा है। हालाँकि अधिकाँश पोस्टों में कमेंट्स नहीं भी मिले, लेकिन ब्लॉग में बने डैशबोर्ड पर आँकड़ों से पाठकों की संख्या को देख, लेखों की पठनीयता का अंदाजा मिलता रहता। हालाँकि अब हम इस लाईक-कमेंट्स के मायावी कुचक्र से काफी-कुछ बाहर आ चुके हैं, लेकिन शुरुआती दौर में तो ये सब काफी मायने रखता ही है।
 
मालूम हो कि ब्लॉग की शुरुआत वर्ष 1994 में वेब-डायरी के रुप में हुई थी, लेकिन आज इसका संसार इसके बहुत आगे निकल कर व्यापक रुप ले चुका है। 
 
ब्लॉग का उद्भव एवं विकास यात्रा...
 
हमारे विचार में ब्लॉग रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक ऐसा प्लेटफोर्म है, जहाँ आप अपने विषय के ज्ञान को जिज्ञासु पाठकों के साथ साझा करते हैं। यदि आप अभी विषय विशेषज्ञ नहीं भी हैं, तो भी हर व्यक्ति कुछ मौलिक विशेषताएं लिए होता है, बाहर प्रकट होने के लिए कुछ मौलिक विचार, भाव एवं आइडियाज कुलबुला रहे होते हैं, इन्हें तराशकर दूसरों के साथ शेयर किया जा सकता है। ब्लॉग इसमें बहुत सहायक रहता है। क्रमशः आपकी एक वेब डायरी बनती जाती है, जहाँ आपकी मौलिकता एवं रचनात्मक उत्कृष्टता के कदरदान मिल ही जाते हैं। 
इस संदर्भ में यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक माध्यम है। यदि कंटेट की गुणवत्ता में क्रमशः इजाफा करते रहेंगे, तो पाठकों का प्रवाह बना रहेगा। इसके अतिरिक्त कुछ नए सृजन का आनन्द अपनी जगह, जो स्वयं में एक पारितोषिक रहता है, जो दूसरों की तारीफ न मिलने पर भी ब्लॉगर को मस्त मग्न रखता है। क्रमशः ब्लॉगिंग के तमाम लाभ निष्ठावान ब्लॉगर को समझ आते हैं।
 
ब्लॉगिंग के लाभ
 
अतः ब्लॉग में क्या लिखें, क्या शेयर करें, तो मोटा सा नियम है कि जो रचनात्मक संभावनाएं (किएटिव पोटेंशियल) आपके अंदर पक रही हैं, विचार-भावनाओं का समन्दर लहलहा रहा है, कुछ खिच़ड़ी पक रही है। उसे आप थोड़ा मेहनत कर सृजनात्मक तरीके से पेश कर शेयर कर सकते हैं। यह एक लेख हो सकता है, एक कविता भी हो सकती है, यात्रा वृतांत हो सकता है, एक कहानी हो सकती है या कोई पुस्तक या फिल्म समीक्षा हो सकती है या किसी ज्वलंत मुद्दे फर आपकी परिपक्व राय हो सकती है या आपकी विशेषज्ञता के अनुरुप कुछ और। यह पाठकों की आवश्यकता के अनुुरुप तैयार किया गया कंटेट भी हो सकता है, जिसे आप अपनी विशेषज्ञता के आधार पर साझा करने में सक्षम होते हैं। कुल मिलाकर यह आपके पैशन, आपकी रचनात्मक संभावनाओं, आपके निहायत मौलिक अनुभवों एवं जीवन दर्शन की रचनात्मक अभिव्यक्ति होती है, जिनके साथ आप अपने जीवन की यात्रा में निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ रहे होते हैं। 
 
सृजनात्मक जीवन की साहसिक यात्रा

यदि आप लेखन के क्षेत्र में नौसिखिया हैं व शुरुआती लेखन के गुर जानना चाहते हैं तो इसके लिए आप हमारी ब्लॉग पोस्ट - लेखन की शुरुआत करें कुछ ऐसे को पढ़ सकते हैं, लेखन के विभिन्न चरणों को समझ सकते हैं व आजमा सकते हैं और ब्लॉग की पहली उमदा पोस्ट तैयार कर शेयर कर सकते हैं। इसे शेयर करने के लिए प्रारम्भिक ब्लॉगर्ज के लिए सबसे सरल एवं निःशुल्क व्यवस्था गूगल में उपलब्ध ब्लॉगर सेवा है।
 
 
अपने जीमेल (gmail) एकाउंट के साथ आप अपना खाता खोल सकते हैं, अपना मनभावन नाम देते हुए ब्लॉगर पर उपलब्ध उचित टैंपलेट का चुनाव कर तैयार की गई पहली पोस्ट के साथ शुभारम्भ कर सकते हैं।  
https://www.blogger.com  को खोलें।
create your blog बटन को क्लिक कर, इसमें जीमेल के साथ प्रवेश करें।
ब्लॉग को उचित शीर्षक (Title) दें,
Address में blogspot.com से पहले उचित नाम दें, जो इसमें स्वीकार्य हो। बाद में custom domain से इसे बदला या परिवर्धित किया जा सकता है।
theme में उपलब्ध कई थीम्ज से उपयुक्त का चयन करें, इसे आप बाद में अपनी आवश्यकता व रुचि के अनुरुप बदल सकते हैं।
आपका ब्लॉग तैयार हो जाएगा।
New post बटन को क्लिक कर उपयुक्त शीर्षक व नीचे खाने में टाईप किया मैटर पेस्ट् करें।
दायीं ओर ऊपर post setting में label को क्लिक कर पोस्ट से जुड़े तीन-चार की-वर्ड टाईप करें, जो पोस्ट प्रकाशित करने के बाद पोस्ट के नीचे अंत में दिखेगी
ऊपर दायीं ओर Publish बटन दवाने पर पोस्ट पब्लिश हो जाएगा। इससे पहले preview बटन को दबाकर पोस्ट के स्वरुप को प्रकाशन से पूर्व एक बार चैक कर सकते हैं। 
 अब आपका ब्लॉअपनी पहली पोस्ट के साथ तैयार है। जिस आप जब चाहें अपने मित्रों या पब्लिक के बीच विभिन्न सोशल मीडिया में शेयर कर सकते हैं।
 
 
एक ब्लॉग के लेआउट में मोटा-मोटी चार हिस्सा होते हैं।
 
एक ब्लॉग की आधारभूत संरचना
 
ऊपर हेडर में ब्लॉग का शीर्षक व इसके सार को अभिव्यक्त करता उपशीर्षक व उपयुक्त फोटो। इसके दायीं और मुख्य कंटेंट रहता है, जिसमें आपकी नयी पोस्ट की लिखी हुई सामग्री व फोटो रहती हैं। ब्लॉग के वायीं और साईडवार में आपका प्रोफाईल फोटो-संक्षिप्त परिचय, विज्ञापन, आपके अनुसरणकर्ता, लोकप्रिय पोस्टों की एक निश्चित संख्या, कुल दर्शक संख्या आदि होते हैं इसी तरह ब्लॉग के नीचे फुटर में अपनी संपर्क मेल, कॉपीराईट स्टेटमेंट, व कोई विशिष्ट पोस्ट आदि को सजा सकते हैं।

अपनी पोस्ट के साथ विषयानुरूप उचित चित्रों का संयोजन कर इसे और अधिक रोचक एवं प्रभावशाली बना सकते हैं। इसके साथ ब्लॉग के लेआउट में जाकर विभिन्न गैजेट्स जोड़कर अपने ब्लॉग को अधिक आकर्षक, यूजर फ्रेंडली एवं प्रभावशाली बना सकते हैं।
 
          ले आउट सेक्शन में उपलब्ध गैजेट वार
 
ब्लॉग के संदर्भ में एक अहं बात का यहाँ जिक्र करना चाहूंगा, जिससे आपका ब्लॉग एक बार शुरु होकर फिर अनवरत चलता रहे। वह है ब्लॉग से जुड़ा आपका पैशन या जुनून। एक बार इसको अवश्य टटोलें व खोजें, जो आपके जीवन के मकसद से जुड़ा हो, जिससे कि इसे आप परिस्थितियों के तमाम विषम थपेड़ों के बीच भी उत्साह एवं निष्ठा के साथ आगे बढ़ सकें। इसके अभाव में नियमित अन्तराल पर ब्लॉग को मेंटेन रखना कठिन हो जाता है। 
हम कितने ऐसे ब्लॉगर्ज को जानते हैं, जो शुरु तो जोश के साथ किए थे, लेकिन जोश कुछ माह बाद ठंडा पड़ता गया। फिर कई महिनों का गैप होता गया। कुछ तो सालों का गैप लिए हुए हैं तथा जोश में शुरु हुए ब्लॉग अपने वजूद के लिए संघर्ष की स्थिति में हैं तथा कई अपना दम तोड़ चुके हैं। 
आपके ब्लॉग के साथ भी ऐसा कुछ न हो, तो समझना जरुरी है कि ब्लॉग के बारे में आपका पैशन ही शुरुआत है, आपका जुनून ही मध्य है और यही आपको नए मुकाम तक पहुँचाने वाला कीमिया है। 
 
ब्लॉगिंग का सारा खेल आपके पैशन, आपके जुनून का है
 
यदि आप अपनी ब्लॉगिंग पर डटे रहे, तो क्रमशः आपकी लेखन शैली में सुधार आएगा। आपके विचारों में धार आएगी। हर ब्लॉग के साथ मन का गुबार हल्का होगा तथा सृजन का आनन्द आपकी झोली में होगा। इसके साथ आपके ब्लॉग पर ट्रेफिक बढ़ना शुरु होगा। एक सुहानी सुबह आपको सुखद अहसास होगा कि अपनी रूचि के कुछ विषयों में आप एक विशेषज्ञ के रुप में उभर रहे हैं। गूगल में अपने ट्रैफिक फ्लो के साथ इन विषयों का आप इसका सहजता से अनुमान लगा सकते हैं। 
और यदि आप कभी चाहें तो ब्लॉगिंग को एक प्रोफेशनल ब्लॉगर्ज के रुप में अपनी कमाई का माध्यम भी बना सकते हैं। हालांकि इसकी अलग दुनियाँ है, जिस पर अभी हम अधिक कहने के अधिकारी विद्वान नहीं है। लेकिन सार रुप में ब्लॉग कमाई का भी माध्यम हो सकता है। ब्लॉग शुरु करने के कुछ माह बाद ही ब्लॉगर में उपलब्ध एड-सेंस एक्टिवेट हो जात है और आपके ब्लॉग को विज्ञापन मिलना शुरु हो जाते हैं, जिन पर यदि कोई पाठक क्लिक करता है, तो एक निश्चित राशि आपके ब्लॉग खाते में जुड़ना शुरु हो जाती है।
आर्थिक पहलु को छोड़ भी दें, तो ब्लॉग क्रिएटिव लोगों के लिए एक अद्भुत प्लेटफॉर्म है। अध्ययन-अध्यापन एवं पढ़ने-लिखने से जुड़े लोगों के लिए तो यह अभिन्न सहचर है, जिसे आज के वेबमाध्यम के युग में नजरंदाज नहीं किया जा सकता। (और कोविड काल के बाद तो यह प्लेटफार्म ऑनलाईन पढ़ाई का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर चुका है, जिसे कोई भी शिक्षा से जुड़ा व्यक्ति नजरंदाज नहीं कर सकता।)
 


ब्लॉगिंग का अकादमिक महत्व

तः एक बार शुरु करने के बाद फिर आपको अपने ब्लॉग पर नियमित अन्तराल पर कुछ लिखते रहना है, कोई भी माह नागा नहीं जाना चाहिए, यह न्यूनतम है। अधिक की कोई सीमा नहीं। औसतन दो से तीन पोस्ट तो माह में डाल ही सकते हैं। यह एक मेरी तरह स्वान्तः सुखाय ब्लॉगर्ज का औसत है, जबकि प्रोफेशनल ब्लॉगर्ज का औसत सप्ताह में दो-तीन पोस्ट रहती है। आप भी अपनी शुरुआत न्यूनतम निष्ठा के साथ हल्के एवं मस्ती भरे अंदाज में कर सकते हैं। 
यदि इतना कुछ समझ आ रहा हो, तो फिर इंतजार कैसा? 
आज, इसी सप्ताह आप अपने जुनून के साथ अपनी रचनात्मक संभावनाओं (creative potential) को अभिव्यक्त करते एक उम्दा ब्लॉग की शुरुआत कर सकते हैं। ब्लॉगिंग की रोमाँचक दुनियाँ आपका इंतजार कर रही है।
 
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