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मेरा गाँव मेरा देश – मौसम वसन्त का, भाग-2

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सर्दी के बाद वसंत की वहार   खेतों के कौने में नरगिस के पुष्पगुच्छ चांदी की थाल में सजी सोने की कटोरियों सा रुप लिए सबको मंत्रमुग्ध करते। इनके दर्शन जहाँ मन को एक नई ताजगी देते, वहीं उनकी मादक खुशबू मस्तिष्क में एक अद्भुत अनुभव का संचार करती।   नरगिस के साथ खेतों के बीचों बीच मदोहुला( ट्यूलिप ) के फूल एक अलग ही रंगत बिखेर रहे होते। इनके लाल , पीले , गुलावी , सफेद रंगों के मिश्रण से सजी फूलों की वारात खेत में खुशनूमा रौनक लाती। फलदार पेड़ों में सबसे पहले आलूबुखारा व प्लम आदि के पेड़ सफेद फूलों से लदना शुरु हो जाते। प्लम के सफेट फूल आकार में छोटे किंतु गुच्छों में एक अलग ही सात्विक आभा लिए होते। प्लम के बगीचे दूर से ऐसे लगते जैसे घाटी ने सफेद चादर ओढ़ ली हो। इसके साथ चैरी के फूल नए रंग घोलते।        घर के आस-पास खुमानी के पेड अपनी गुलाबी-स्वर्णिम आभा के साथ आँगन , खेत , गाँव एवं घाटी को नयनाभिराम सौंदर्य का अवदान देते। दूर से ही देखने पर , घाटी के आर-पार इनके दर्शन सुखद अनुभूति देते। इनके साथ बादाम के पेड़ तो और भी मुखर रुप में अपनी बासन्ती आभा को प्रक