मोह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मोह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 31 मई 2017

मुट्ठी से दरकता रेत सा जीवन


कभी न होगी जैसे अंधेरी शाम
जी रहे इस घर-आंगन में ऐसे,
जैसे हम यहाँ अजर-अमर-अविनाशी,
रहेगा हमेशा संग हमारे यह संसार, घर-परिवार,
संग कितने साथी सहचर शुभचिंतक, न होगा जैसे कभी अवसान।
इसी संग आज के राग-रंग, कल के सपने बुन रहे,
कभी न होगा वियोग-विछोह,
जी रहे ऐसे जैसे रहेंगे यहाँ हर हमेशा,
नहीं होगा अंत हमारा, न आएगी कभी अंधेरी शाम।
 संसार की चकाचौंध में मश्गूल कुछ ऐसे,
जैसे यही जीवन का आदि-अंत-सर्वस्व सार,
बुलंदियों के शिखर पर मदमस्त ऐसे,
चरणों की धूल जैसे यह सकल संसार।
लेकिन काल ने कब इंतजार किया किसी का,
लो आगया क्षण, भ्रम मारिचिका की जडों पर प्रहार,
क्षण में काफुर सकल खुमारी, फूट पड़ा भ्रम का गु्ब्बार,
उतरा कुछ बुखार मोह-ममता का, समझ में आया क्षणभंगुर संसार।
रहा होश कुछ दिन, शमशान वैराग्य कुछ पल,
फिर आगोश में लेता राग-रंग का खुमार,
मुट्ठी से दरकता फिर रेत सा जीवन,
                     होश के लिए अब अगले प्रहार का इंतजार।

चुनींदी पोस्ट

In the uplifting company of SWAMI VIVEKANANDA

Stick to your heartfelt CONVICTION, rest assured!                   1.      Be aware of your Divine essence & Love yourse...