संदेश

अगस्त 15, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेरा गाँव मेरा देश - बेसिक कोर्स का रोमाँच, भाग-2

चित्र
मानाली से जिंगजिंगवार घाटी का रोमाँचक सफर पिछली ब्लॉग पोस्ट में पर्वतारोहण संस्थान में बिताए पहले नौ दिनों का वर्णन किया था, जिसमें रॉक क्लाइंबिंग, रिवर क्रॉसिंग, बुश क्राफ्ट जैसी आधारभूत तकनीकों का प्रशिण दिया गया। अब हम अगले पड़ाव के लिए तैयार थे। हिमाचल परिवहन निगम की 2 बसों में सबके सामान की पेकिंग हो जाती है और यात्रा रोहतांग पास के उस पार लाहौल घाटी में स्थित बेस कैंप जिस्पा की ओर बढ़ती है, जहाँ भागा नदी के किनारे पर्वरोहण संस्थान का स्थानीय केंद्र स्थापित है। मानाली से रोहताँग पास तक इस यात्रा का पहला चरण मान सकते हैं, जब बस पहले पलचान तक बाहंग, नेहरुकुण्ड जैसे स्थलों से होकर ब्यास नदी के किनारे सीधा आगे बढ़ती है। सामने सफेद दिवार की तरह खड़ी पीर-पंजाल की हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाएं ध्यान को आकर्षित किए रहती हैं। पलचान से चढ़ाई शुरु होती है, जो लगभग 13000 हजार फीट पर स्थित रोहताँग पास तक क्रमशः बढ़ती जाती है। इसके रास्ते में कोठी, गुलाबा फोरेस्ट, मढी आदि स्थल आते हैं। कोठी अंतिम मानव बस्ती है, जहाँ से देवदार के घने जंगल शुरु होते हैं। ब्यास नदी की धार नीचे गहरी ख