मंगलवार, 20 अगस्त 2019

हे सृजन साधक, हर दिन भरो कुछ रंग ऐसे


मिले जीवन को नया अर्थ और समाधान
हर दिवस, एक नूतन सृजन संभावना,
प्रकट होने के लिए जहाँ कुलबुला रहा कुछ विशेष,
एक खाली पट कर रहा जैसे इंतजार,
रचना है जिसमें अपने सपनों का सतरंगी संसार।1।

आपकी खूबियां और हुनर हैं रंग जिसके,
अभिव्यक्त होने का जो कर रहे हैं इंतजार,
 अनुपम छटा बिखरती है जीवन की या होता है यह बदरंग,
तुम्हारे ऊपर है सारा दारोमदार।2।


शब्द शिल्पी, युग साधक बन, हो सकता है सृजन कुछ मौलिक,
जिसे प्रकट होने का है बेसव्री से इंतजार,
आपके शब्द और आचरण से मिलेगी जिसे अभिव्यक्ति,
झरेगा जिनसे आपका चिंतन, चरित्र और संस्कार।3।

अतः हे पथिक, बन सृजन साधक,
भरो जीवन में हर दिन रंग कुछ ऐसे,
 झरता हो जिनमें जीवन का भव्यतम सत्य,
मिलता हो जहाँ जीवन को नया अर्थ और समाधान।4।