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यात्रा वृतांत - हमारी पहली विदेश यात्रा, भाग-1

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मेरी पौलेंड यात्रा, भाग-1 दिल्ली से बिडगोश वाया फ्रेंकफर्ट,जर्मनी पृष्ठभूमि एवं कृतज्ञता ज्ञापन – यह हमारी पहली विदेश यात्रा थी। विश्वविद्यालय के अकादमिक एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत निर्धारित इरेस्मस प्लस टीचर मोबिलिटी कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से हमारा जाना तय हुआ। इस चयन के लिए हम प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी के सदैव आभारी रहेंगे। श्रद्धेय कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी एवं स्नेहस्लीला श्रद्धेया शैल जीजी के भी हम आभारी हैं उनके आशीर्वचनों एवं यात्रा के लिए आवश्यक आर्थिक संरक्षण प्रदान करने के लिए। आभारी रहेंगे ज्वलन्तजी के, यात्रा के लिए आवश्यक पासपोर्ट, वीजा आदि की व्यवस्था करने से लेकर एक सतत् सहयोगी-मार्गदर्शक की भूमिका में उपलब्ध रहने के लिए। विदेश विभाग, शाँतिकुंज के सोमनाथ पात्राजी के सहयोग के भी हम आभारी हैं। पिछली वार पोलेंड से लौटे डॉ.इप्सित प्रताप सिंह से हुई चर्चा भी हमारे इस संदर्भ में बहुत उपयोगी थी। डोमेस्टिक फ्लाईट में पहली यात्रा का वर्णन पिछली हमारी पहली हवाई यात्रा वृतांत में कर चुका हूँ, इस बार अंतर्राष्ट्