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यात्रा वृतांत – जब आया बुलावा बाबा तुंगनाथ का, भाग-2

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अगस्त्यमुनि से तृतीय केदार तुंगनाथ का रोमाँचक सफर  चोपता की ओर – अगस्त्यमुनि से आगे रास्ते में सुदूर केदारनाथ साइड़ के हिमाच्छादित पर्वतों के दर्शन श्रद्धापूरित रोमाँच के भाव जगा रहे थे। रास्ते में ही पहाडों की गोद में विशेषकर ऊँचाईयों में बसे गाँवों व घर को देखकर हमेशा की तरह रोमाँच हो रहा था कि लोग इस ऊँचाई पर कैसे रहते होंगे , प्रकृति की नीरव गोद में यहाँ जीवन कितना शांत व निश्चिंत होता होगा।  रास्ते में ही बारिश का अभिसिंचन शुरु हो चुका था। हम इसे प्रकृति के स्वागत का एक शुभ संकेत मान रहे थे। बस केदारनाथ की राह पर आगे बढ़ रही थी। बीच में रास्ता दाईं ओर ऊखीमठ की ओर मुड़ जाता है।  पहाड़ों का असली सौंदर्य यहाँ से शुरु होता है। दूर हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाएं लुका छुपी करती हुई सफर के आनन्द को बढा रही थीं। पहाड़ काटकर बनाए गए सीढ़ीनुमा खेत बहुत सुंदर लग रहे थे। इसमें उपजे शुद्ध आर्गेनिक अन्न , फल व सब्जियाँ कितने स्वादिष्ट व पौष्टिक होते होंगे , कल्पना कर रहे थे। लेकिन   इनमें खेती कितना श्रमसाध्य होती होगी , इसका भी अनुमान लगा रहे थे।  रास्ते में कई छोटे गाँ