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मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

ध्येय निष्ठा


मंजिल की ओर बढ़ती रुत दीवानी

कौन पूर्ण यहाँ, हर इंसान अधूरा,
लेकिन, पूर्णता की ओर बढ़ने की चाहत,
भीड़ से अलग कर देती है एक इंसान को।
अपने ध्येय के प्रति समर्पित,
लेजर बीम की तरह लक्ष्य केंद्रित,
एक विरल चमक देती है यह निष्ठा एक इंसान को।

उससे भी आगे,
हर प्रहार, हर चुनौती, हर मंजर के बीच भी,
मोर्चे पर खड़ा, अपने कर्तव्य पर अडिग-अविचल,
मिशन को सफल बनाने में तत्पर,
मोर्चे का चैतन्यतम घटक, प्रहरि सजग,
अभियान को मंजिल के करीब पहुँचा रहा हर ढग।

फिर, जमाने से दो कदम आगे की सोच,
बदलते जमाने की नब्ज भी रहा टटोल,
सबको आगे बढ़ने के लिए कर रहा प्रेरित-सचेत।
बिरल है यह कोटी तत्परता की, प्रेरक अतिभावन,
ऐसी सजग निष्ठा के संग हमने,
कई सफलतम् अभियानों को अंजाम होते देखा है।

नहीं यह महज किसी एक व्यक्ति की कहानी,
यह हर विजयी मुस्कान, सफल समाज की जुबानी,
तमाम मानवीय दुर्बलताओं, मजबूरियों के बीच,
हर कसौटी पर कसते, मंजिल की ओर बढ़ रही रुत दीवानी,
मानवीय नहीं, अतिमानवीय प्राण झरते हैं फिर वहाँ,

हवा के रुख को बदलने के होते हैं चमत्कार यहाँ।


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प्रबुद्ध शिक्षक, जाग्रत आचार्य

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