हम रहें या न रहें, सच जिंदा रहना चाहिए
हम रहें या न रहें, सच जिंदा रहना चाहिए,
धर्म-मर्यादा संग इंसानियत को स्थान मिलना चाहिए।1
आदर्श सिद्धान्तों की बातें अच्छी,
व्यवहारिक धरातल का भी अहसास होना चाहिए।2
काम बनें या बिगड़े, या थोड़ी देर में होते हैं
पूरे,
आपसी प्यार-सद्भाव-भाईचारा बना रहना चाहिए।3
नहीं कोई परमहंस इस रंग बदलती दुनियाँ में,
मानवीय दुर्बलताओं के प्रति उदार भाव रहना चाहिए।4
नहीं संत बनता यहाँ कोई एक दिन में इस धरा पर,
सुधरने का मौका सबको मिलता रहना चाहिए।5
अपनी मूढ़ता की आँधी में हो सवार कोई अगर,
तो उस लाइलाज मर्ज़ का उपचार होना चाहिए।6
नहीं समाधान मर्ज का अपने हाथ में को,
इस सृष्टि के मालिक पर छोड़ देना चाहिए।7
हर व्यक्ति जिम्मेदार है अपने चिंतन व कर्म के
लिए,
अपने कर्तव्य के प्रति सबको ईमानदार-जिम्मेदार
रहना चाहिए।8



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