ब्लॉगिंग का सृजन पथ, इसकी संभावनाएं और चुनौतियाँ
एआई के युग में जब एक प्रॉम्पट के साथ पूरा लेख, कविता, कहानी,
स्क्रिप्ट आदि कुछ सेकंड, मिनट में तैयार हो रही हो और युग रील्ज व शॉर्ट्स का हो,
वीडियो व पॉडकास्ट का हो, तो ऐसे में मौलिक लेखन आधारित ब्लॉगिंग के क्या मायने
हैं। जेन-जी इसी उहापोह में ब्लॉगिंग को अपनाने से कतरा रही है। क्योंकि यह एक
धीमी प्रक्रिया है, इसके आर्थिक लाभ उतने लुभावने नहीं प्रतीत होते, बल्कि शुरु
में तो नगण्य रहते हैं, फिर तेजी से भागती जिंदगी में किसी को ठहरकर पढ़ने की
फुर्सत भी नहीं। डिजिटल और सोशल मीडिया ने बैसे ही नई पीढ़ी की रीडिंग हेविट का
सत्यनाश कर रखा है। ऐसे में मौलिक लेखन आधारित ब्लॉगिंग क्यों करें, नई पीढ़ी के
सामने यह एक यक्ष प्रश्न उठ सकता है, बल्कि उठता है।
पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से लगातार अपना ब्लॉग मेंटेन कर रहा,
ब्लॉगिंग के कई ऑनलाइ व ऑफलाइन कोर्स पढ़ा चुका यह ब्लॉगर अपने अनुभव से कुछ
अनुभूत बातों को, 12 वर्षों के सार सवक व संदेश के रुप में शेयर कर सकता है, जो
शायद ब्लॉगिंग की दिशा में कदम उठाने वाले नए मौलिक सृजनधर्मियों के कुछ काम आए।
यह एक स्वान्तः सुखाय ब्लॉगर की अनुभव गाथा है, लेकिन इसके सार-सबक व निष्कर्ष ब्लॉगिंग
की दिशा में कदम बढाने वाले सभी ब्लॉगर्ज के कुछ काम अवश्य आएंगे, इतना हम विश्वास
के साथ कह सकते हैं।
हमारे अनुभव में ब्लॉगिंग की शुरुआत तो उत्साह में या फिर देखा-देखी या पाठ्यक्रम की बाध्यता के चलते कई विद्यार्थी व शिक्षक करते हैं, लेकिन कुछ माह, साल बाद फिर ब्ल़ॉगिंग के प्रति उनका उत्साह ठंडा पड़ने लगता है और वे इसके प्रति उदासीन हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें ब्लॉगिंग से तात्कालिक किसी प्रकार का कुछ विशेष लाभ मिलता प्रतीत नहीं होता। फिर कुछ सप्ताह, माह में बेतरतीब कुछ ब्लॉग पोस्ट तैयार होती हैं और अन्त में उत्साह के साथ शुरु किया गया ब्लॉग ठप्प पड़ जाता है तथा अपने निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले ही कालकल्वित हो जाता है, बीच रास्ते में ही खो जाता है।
हमारे अनुभव में ब्ल़ॉग बंद होने का मुख्य कारण रहता है, उनके ब्लॉग
का किसी गहन अंतःप्रेरणा से उद्भूत या जुड़ा न होना। यदि ब्लॉग जीवन के किसी शौक
(हॉवी), पैशन, जुनून से जुड़ा हुआ होता, तो फिर इसके बंद होने का प्रश्न ही नहीं
उठता, क्योंकि यह ब्लॉगर के जीवन का प्राण है, जीवन की विकास यात्रा की अभिव्यक्ति
है, जिसको आप जी रहे हैं। आखिर, ब्लॉग जीवन के विकास क्रम के साथ परिवर्तित,
परिवर्धित होते जुनून, पैशन व जीवन के विजन एवं मिशन की विकास यात्रा को शेयर करने
का एक माध्यम भर तो है। अपने नाम के अनुरुप भी ब्लॉगिंग वेब डायरी है। यदि आप
नियमित रुप से अपना लेखा-जोखा रख रहे हैं, डायरी लिखने के आदी हैं, तो माह में
इनको थोड़ा सुव्यवस्थित कर संस्मरण, कविता, लेख, यात्रा वृतांत, स्वाध्याय सार,
जीवन दर्शन आदि के रुप में सहज रुप में प्रस्तुत कर सकते हैं।
अतः यदि आप अपने जीवन के प्रति थोड़ा भी गंभीर हैं, पर्याप्त रुप से स्पष्ट हैं, पढ़ने-लिखने व गहन चिंतन-मनन के अभ्यस्त हैं और कुछ देर ठहर कर, टिक कर बैठ सकते हैं, तो फिर ब्लॉगिंग आपके लिए है। यदि आप अपने अंतःकरण की कुलबुलाहट, पीड़ा, उत्साह, आशा, हताशा, निराशा और जीवन के इन उतार-चढावों के पार ले जाती संघर्ष-गाथा को पाठकों के साथ शेयर करना चाहते हैं, उन्हें भी इस यात्रा का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो फिर ब्लॉगिंग आपके लिए है। यदि आप कलम के सिपाही के रुप में अपने जीवन और चहुं ओर के अंधकार के बीच प्रकाशदीप बनकर इसके कुहासे को भेदने का दुस्साहस रखते हैं, तो ब्लॉगिंग आपके लिए है।
यदि आप कलमवीर बनकर युगसृजन के महाअभियान में अपनी लेखनी से कुछ सृजन
पुष्प युगदेवता को भेंट करना चाहते हैं, तो ब्लॉंगिंग आपके लिए है। यदि आप सत्यं,
शिवं, सुंदरं के उपासक हैं व इन आदर्शों से पगे जीवन के अनुभव जग को सुनाना चाहते
हैं और जीवन को सत्यता, शिवत्व एवं सौंदर्य के सकारात्मक भाव के साथ आप्लावित करना
चाहते हैं, तो फिर ब्लॉगिंग आपके लिए है। यदि आप कलम के माध्यम से सकारात्मक
परिवर्तन के संवाहक बनने की अदम्य इच्छा रखते हैं, तो ब्लॉगिंग आपके लिए हैं।
यदि इतना कुछ है, तो आप आज अभी, ब्लॉगिंग की दुनियाँ में कदम उठाने के लिए संकल्पित हो जाएं। और अपने पैशन, अंतःप्रेरणा तथा जीवन के विजन पर आधारित एक ब्लॉग शुरु कर दें। जिस भी विषय पर आपका कुछ अधिकार है, अनुभव हैं, उस पर अपनी कलम चलाना प्रारम्भ कर दें। इस दिशा में किसी तरह के सहयोग या मार्गदर्शन की आवश्यकता हो तो आपको इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहज रुप में उपलब्ध होती रहेगी।
यदि आप अपनी धुन के पक्के इंसान हैं, तो आप पाएंगे कि आपकी ब्लॉग
यात्रा में सृजन की धारा कुछ ऐसे ही प्रवाहित हो उठेगी, जैसे गौमुख से गंगा की
धारा। क्रमिक रुप से इसका प्रवाह गति पकड़ेगा। और फिर आप ब्लॉगिंग से जुड़े
सृजनात्मक आनन्द को अनुभव कर रहे होंगे। यदि आप मौलिक लेखन करेंगे, तो आपकी एक
अपनी लेखन शैली रुपाकार ले रही होगी और आप अपनी मौलिक अद्वितीयतता के उभार, निखार
एवं गौरव बोध के साथ आगे बढ़ रहे होंगे, जिसको छोड़ने का फिर प्रश्न ही नहीं उठता।
फिर दूसरे आपके ब्लॉग पर कितने कमेंट करते हैं, कितनी प्रशंसा करते
हैं, ये अधिक मायने नहीं रखते। हाँ, इनसे आपका उत्साहबर्धन अवश्य होता है, लेकिन
आप अपनी ब्लॉगिंग यात्रा के लिए इनकी बैसाखियों पर निर्भर नहीं होंगे। यदि कोई उपहास
भी उड़ाता है या उपेक्षा, अवमानना भी करता है, तो ये चुनौतियाँ तो एक शेरदिल इंसान
के लिए सृजन का आवश्यक ईंधन का ही काम करती हैं।
हम तो यहाँ तक कहने का दुस्साहस रखते हैं कि आप बिना किसी सोशल मीडिया
पर शेयर किए, बिना किसी अन्य तकनीकी जानकारी के, बिना किसी प्रचार-प्रसार के भी
अपने सकारात्मक एवं मौलिक कंटेंट के दम पर अपनी पहचान बना सकते हैं तथा कदरदानों
का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। बस शर्त एक ही है कि आपको अपार धैर्य, अद्म्य
उत्साह एवं ईमानदारी के साथ काम करते रहना है।

याद रहे, ब्लॉगिंग एक आध्यात्मिक यात्रा भी है, जिसमें आपके धैर्य, साहस, अध्यवसाय, झूठी आशा-अपेक्षाओं, आलस-प्रमाद, ईमानदारी, मौलिकता को अग्निपरीक्षा के दौर से भी गुजरना होगा और यदि आप अपनी धुन के पक्के हैं, तो संघर्ष की तपन में आपके अंतर की अनगढ़ता, वैचारिक अस्त-व्यस्तता, भावनात्मक अपरिपक्वता समय के साथ परिष्कृत होती जाएगी और आपकी आत्मिक आभा प्रकट एवं व्यक्त होगी, जिसके कुछ छींटे ब्लॉगिंग के माध्यम से सुधी पाठकों पर अवश्य पड़ेंगे। वे भी आपके ब्लॉग को पढ़कर प्रेरित, प्रोत्साहित होंगे औ अपने ढंग से सृजनपथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। इस तरह कलम के माध्यम से अपने मौलिक सृजन के साथ सकारात्मक परिवर्तन का संवाहक होना, अपने जीवन को रुपाँतरित एवं विकसित होते देखना ब्लॉगिंग का सबसे बड़ा पारितोषिक है। जिसने एक बार इसका स्वाद चख लिया, फिर ब्लॉगिंग के अन्य लाभ गौण हो जाते हैं और स्वतः ही समय के साथ अनुसरित होते हैं।



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